नवरात्रों में माता के इन नौ चमत्कारी अवतारों की है मान्यता| कौनसे अवतार में खुद को मानती हैं फिट

Goddess Durga

नवरात्री  में हम माँ दुर्गा  के नौ स्वरूपों  की पूजा नहीं करते बल्कि नारी की उन शक्तियों की पूजा करते हैं जो सृष्टि का निर्माण करती है।  भले आप हाउसवाइफ हों या वर्किंग विमन रोज़मर्रा की दिनचर्या में कई ऐसे काम कर जाती हैं जो किसी चमत्कार से कम नहीं होता। इसका कारण यह है की हम सभी में कहीं न कहीं इन नौ देवियों के गुण हैं।  लेकिन इसका एहसास हमें नहीं है। नवरात्रि के आगाज़ में यह लेख आपको समर्पित है। पढ़ें और हमे बताइये की आप इन नौ स्वरूपों  में से खुद को  कौनसे रोल में फिट पाती हैं।

शैलपुत्री

First form of Goddess Durga-Shailputri
First form of Goddess Durga-Shailputri

शैलपुत्री को माता के प्रथम अवतार के रूप में माना जाता है। यह पर्वत के राजा हिमालय की पुत्री थीं। पर्वत को दृढ़ शक्तिआधार व स्थिरता का प्रतीक  माना जाता। ये ठीक वैसा ही है जैसे आप अपने परिवार का सपोर्ट सिस्टम हैं।  उसी तरह यह माता  सृष्टि को दृढ़ और शक्तिशाली बनाती  है । माता हमारे मन को स्थिरता और शांति प्रदान करती हैं।

ब्रह्मचारिणी

Second form of Goddess Durga-Bhrahmacharini
Second form of Goddess Durga-Bhrahmacharini

पंडितों का मानना है की माँ के इस रूप की पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य और संयम की भावना का विकास होता है। महिलाएं भी अपने परिवार और उनकी खुशियों के लिए कितना त्याग करती हैं। चाहे परिवार में कितने उतार चढ़ाव आएं वे संयम से काम लेती हैं।

चंद्रघंटा

Third form of Goddess Durga-chandraghanta
Third form of Goddess Durga-chandraghanta

अगर आप बेहद बोल्ड और ब्रेव व्यक्तित्व की धनी हैं  तो आप में कहीं न कहीं चंद्रघंटा माँ का स्वरुप छिपा है।   मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप को चंद्रघंटा के नाम से जानते हैं। इनकी आराधना नवरात्रि की तृतीया, यानी तीसरे दिन  को की जाती है। इनकी उपासना से वीरता के गुणों में वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य अलौकिक मधुरता आती है। इन सब गुणों के साथ एक आकर्षक पर्सनालिटी उभरकर सामने आती है

कुष्मांडा

Fourth form of Goddess Durga-Kushmanda
Fourth form of Goddess Durga-Kushmanda

कुष्मांडा माँ का महत्व बहुत ही खास है। सूर्यलोक  में रहने की क्षमता सिर्फ इन्ही माता में हैं।  क्यूंकि कुष्मांडा माँ  ने अपने तेज से चारों दिशाएँ आलौकिक  कर रखी हैं। इनके शरीर की कांति सूर्य समान  प्रकाशमान है।  अगर आपने भी अपने तेज और प्रकाश  से  पूरे परिवार, कुटुंब और वर्कप्लेस को प्रकाशमान कर रखा है,  तो समझिये की आप में कुष्मांडा माँ सरीके गुण  मौजूद हैं।

स्कंदमाता

Fifth form of Goddess Durga-Skandmata
Fifth form of Goddess Durga-Skandmata

माता का यह रूप बेहद सरल और सहज है। आपने भले बुरे से बुरा काम भी क्यों  न किया हो, माता की शरण में जाने से  आपको  माँ माफ़  कर ही देती है और आपको मोक्ष की प्राप्ति होती। महिलाओं का भी दिल उदार होता है। उनमें भी तो क्षमा भाव भरा होता है। अगर आपमें भी यह गुण है तो आप इन माता की पूरक हैं।

कात्यायनी मां

Sixth form of Goddess Durga-Katyayayini
Sixth form of Goddess Durga-Katyayayini

कात्यायनी माँ की उपासना करने से आपको अपने क्षत्रुओं  से लड़ने की हिम्मत मिलती है।  आप सभी दुविधाओं को बड़े  पराक्रम से पार कर बड़ा पद प्राप्त करते हैं। कात्यायनी साधक को दुश्मनों का संहार करने में सक्षम बनाती हैं। अगर आपमें भी वीरता कूट कूट के भरी है तो  आप भी माँ कात्यायनी की परछाई हैं।

कालरात्रि

Seventh form of Goddess Durga-Kaalratri
Seventh form of Goddess Durga-Kaalratri

इनकी पूजा-अर्चना करने से भक्‍तों को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही उनके दुश्मनों का भी नाश होता है। कहते हैं कि मां कालरात्रि का रूवस्‍प तेज बढ़ाता है। इन माँ का शरीर घने अन्धकार जैसा काला  है।  ये आपके जीवन से अन्धकार को हटाने की क्षमता रखती हैं।  इनका रूप भयानक है। माँ अपने  इस स्वरुप में काल से लड़ती हैं। जरुरत पड़ने पर हर महिला घने अन्धकार को दूर करने के लिए कालरात्रि का रूप धारण करती है। तो हुआ न आप में कालरात्रि माँ का ये  गुण ??

महागौरी

Eighth form of Goddess Durga-Maha Gauri
Eighth form of Goddess Durga-Maha Gauri

महा गौरी माँ का वर्ण गोरा है।  उनके कपडे और आभूषण सफ़ेद है।  माँ आपके आंतरिक मन को शान्ति प्रदान करती है,  अंदर से मजबूत बनाती  है। माँ की उपासना से  कठिन और मुश्किल दौर में आप बहुत ही शान्ति  से काम लेते हैं।

सिद्धिदात्री

Ninth form of Goddess Durga-Siddhidatri
Ninth form of Goddess Durga-Siddhidatri

अपने भक्तों को महाज्ञान देती हैं। साथ ही इनकी उपासना करने वाले को सभी सिद्धियां मिलती हैं।  एक महिला माँ के रूप में अपने बच्चों को ज्ञान तो देती ही हैं साथ ही उन्हें सारी  सिद्धियां  देने में जीवन भर तत्पर रहती हैं।

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