इंद्रा नूयी के बिज़नेस या स्टार्ट अप को सफल करने के 5 सक्सेस सूत्र

मैं दूसरों से कभी वो काम नहीं करवाती जो मैं खुद न कर सकूँ- इंद्रा नूयी

इंद्रा नूयी का यह वाक्य पढ़ कर आप सोचेंगे की जितना यह कहना आसान है उतना ही करना मुश्किल है। लेकिन इंद्रा नूयी, जिन्होंने हाल ही पेप्सिको कंपनी के 12 साल के करियर को अलविदा कहा है, इसी वाक्य से उन्होंने अपनी लीडरशिप का लोहा पूरे विश्व में मनवाया है।

येल यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट की पढाई के साथ पैसा कमाने के लिए रिसेप्शनिस्ट की नौकरी से शुरुवात करने वाली इंद्रा ने सफलता के लिए हमेशा अपने नियम बनाये हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की इंद्रा जब पहली कंपनी में इंटरव्यू देने गयी थी तब उन्होंने प्रोफेशनल सूट पहना था। उस ड्रेस में वे बेहद असहज थी लिहाजा उन्हें रिजेक्शन मिला। पहले ही इंटरव्यू से लाइफ लर्निंग लेते हुए उन्होंने दूसरे इंटरव्यू में साड़ी पहनी। वहां कोई भी महिला साड़ी पहने हुए नहीं थी। लेकिन इंद्रा अपने ड्रेस में बहुत कॉंफिडेंट थी। इसी वजह से उनका सिलेक्शन भी हुआ। तभी से इंद्रा बी – योर सेल्फ की थ्योरी में भरोसा करने लगी।

यहाँ इंद्रा नूयी के ऐसे ही कई सफलता के सूत्र आज हम आपसे साझा करेंगे। अगर आप कोई बिज़नेस या स्टार्ट अप पर काम कर रहे हैं तो ये सीखें जरूर आपको मोटीवेट करेंगी।

इंद्रा नूयी के बिज़नेस या स्टार्ट अप को सफल करने के 5 सक्सेस सूत्र

कनेक्शन बनायें– आपकी बड़ी कंपनी है या छोटा सा स्टार्टअप। सफलता पाने में आपके लिए कनेक्शंस का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। बड़ी कम्पनी का नेटवर्क तो वैसे भी बड़ा होता है लेकिन अगर कम्पनी छोटी है तो आपको डिजिटल वर्ल्ड का सहारा लेना होगा। आपको उन लोगों से संपर्क बढ़ाने होंगे जो खुद किसी स्टार्टअप पर काम काम कर रहे हैं। ऐसे में उनके अनुभव आपके लिए बड़ी लर्निंग्स साबित हो सकती हैं।

शॉर्ट नहीं लॉन्ग टर्म का सोचें – जिस समस्या से आप आज झूझ रहे हैं। उसके लिए आपको लॉन्ग टर्म और सिस्टेमेटिक सोल्युशन पर काम करना होगा। क्यूंकि कोई समस्या आज आयी है तो जरुरी नहीं की वो अगली बार न आये। इस पर बार बार मेहनत और समय लगाने से अच्छा है की इसका स्थायी समाधान ढूंढा जाए।

लीडरशिप की परिभाषा खुद बनायें– लीडरशिप एक गुण है। इसकी कोई एक परिभाषा नहीं हो सकती। सभी इसे अपने तरीके से समझते हैं। कंपनी में जब आप लीडर की भूमिका में होते हैं तो आपको कर्मचारियों से वो काम करवाना पड़ता है जो उन्हें बिल्कुल जरुरी या महत्वपूर्ण नहीं लगता। लेकिन आप उस वक़्त भविष्य के बारे में सोच रहे होते हैं। इसीलिए आपकी नजर में वो काम जरुरी है। यही गुण आपको दूसरों से अलग और एक कामयाब लीडर बनाता है।

सामना करना सीखें – अगर आप अपनी मंजिल को पाना चाहते हैं तो विपरीत परिस्थितियों का सामना करना सीखें। परिस्थितियों से परेशान होकर भाग जाना सबसे आसान तो होता है लेकिन इससे आप सफलता की ओर कभी भी पहला कदम भी नहीं बढ़ा पाते हैं। अगर आप सामना करना सीख जाते हैं तो डर से हमेशा के लिए ऊपर उठ जाते हैं। आप पूरा परिवार लेकर चलते हैं। हर दिन आपके सामने कई परिस्थितियां आती है जिनके लिए आपको तुरंत निर्णय लेने पड़ते हैं। इसमें जरा भी ढिलाई न बरते। सामना करें, तुरंत निर्णय लें और आगे बढ़ें।

बेहतरीन आईडिया कहीं से भी मिल सकता है– जब में पेप्सिको से छुट्टियां लेकर घर जाती थी तब मेरी माँ मुझे पड़ोसियों और दूर से रिश्तेदारों से मिलवाती थी। तब सभी मुझसे मिलते और मेरी सफलता पर मुझे बधाई देने के बजाय मेरी माँ को बधाई देते। तब मुझे एहसास हुआ की आपकी सफलता में आपकी परवरिश और संस्कारों का अहम् योगदान होता है। मेरी माँ को जब बधाई मिलती तब मुझे बहुत अच्छा महसूस होता था। जैसे ही मैं वापस काम पर लौटी मैंने इसी आईडिया पर काम किया। जैसे ही कोई एम्प्लोयी अच्छा परफॉर्म करता मैं उनके पेरेंट्स को बधाई पत्र लिखती थी। इससे मेरे एम्प्लोयी मोटीवेट होते थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: