जब आपके लिए सारे रास्ते बंद से हो जाते हैं तो युनिवर्स की ताकत आपके लिए दोगुने रास्ते खोल देती है-नूपुर जारोली , न्यूज़ एंकर, ETV राजस्थान

आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहे हैं जो आपको यह मानने पर मजबूर कर देगी की आपके साथ अब तक जो भी बुरा हुआ है या हो रहा है उसकी वजह कहीं न कहीं आपकी नकारात्मक सोच है|

आईये इसी कहानी को हम उस इंसान से सुनते हैं जिन्होंने सकारात्मक विचारों के महत्व को समझा है|

जब आप को सब कुछ खत्म होता सा दिखाई दे और निराशा आपको घेर ले तो एक बात हमेशा ध्यान रखना कि हेलिकोप्टर भी अपनी उड़ान हवा के विपरीत ही भरता है। रिजेक्शन ही आपको जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण सबक सिखा सकती है। और यही सही समय है अपने आप को पहचानने का।

ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ। रिजेक्शन का स्वाद मैंने चखा है और एक बार नहीं कई कई बार। लेकिन मेरा विश्वास मानिए इसके बाद आप एक विशाल मजबूत पहाड़ जैसे बनकर उभरते हो।

चलिए मेरी कहानी की शुरुआत करते हैं, मेरे रिजेक्शन से। मैं हूँ नूपुर जारोली| मैनें अपनी जिंदगी में बहुत सारे रिजेक्शन का सामना किया है। ये उस वक्त कि बात है जब मैं कॉलेज में पढ़ाई करती थी। तब मैं एक बहुत भोली ……. लोगों के शब्दों में कहूं तो बेवकूफ सी और डफर सी लड़की हुआ करती थी। न बात करने का तरीका न रहने का सलीका।  कई बार मजाक का पात्र बनती अक्सर इग्नोर कर दी जाती थी। मेरे आसपास के लाेगों और मुझे खुद को भी मुझ से कोई खासी उम्मीद नहीं थी। लेकिन मैं फिर भी उड़ रही थी, गाड़ी में तेज रफ्तार से दौड़ रही थी कि अचानक एक तेज ब्रेक लगा मानों सब कुछ थम गया हो। एक ऐसा ब्रेक जिसने मेरी कहानी ही बदल डाली।  

जब आपके लिए सारे रास्ते बंद से हो जाते हैं तो युनिवर्स की ताकत आपके लिए दोगुने रास्ते खोल देती है। तब आपको पहचानना होगा कि ये रिजेक्शन नहीं बल्कि आपको अपनी जिदंगी बदलने का मौका दिया जा रहा है। उस एक ईशारे को आपको समझना होगा। अगर आपने द-सीक्रेट पढ़ी है तो आप जान पाएंगें कि युनिवर्स क्या है और उसकी शक्ति कैसे नामुमकिन को मुमकिन बना देती है।

 

जब मुझे रिजेक्शन मिली तो बार बार मंदिर भटकती और भगवान के सामने गिड़गिड़ाती थी कि मुझे रिजेक्शन क्यों मिली। भगवान ने जवाब दिया मैं जैसे ही मंदिर से बाहर निकली मुझे किसी ने पत्रकारिता (जर्नलिज्म) के कोर्स के बारे में बताया। कॉमर्स बैकग्राउंड कि लड़की जर्नलिज्म??    ये सुनने में अजीब तो है पर असल में, मैं अपना ध्यान भटकाना चाहती थी। ये था मेरी ज़िन्दगी का गोल्डन टर्न। नियमित क्लासेस अटेंड करते करते मुझमें जर्नलिज्म का पेशन सा बनने लगा। और हर दिन मैं अपने हैड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. कुजंन जी आचार्य को देख कर ईटीवी चैनल की न्यूज एंकर बनने का सपना बुनने लगी थी। मेरे पेशन को देख सारे लोग कहने लगे कि तुम ज़रूर एक दिन न्यूज एंकर बनोगी।

हमारी ज़िन्दगी में एक जादू होता है जो 100 फीसदी हमेशा काम करता है और वो जादू हमारे शब्दों का होता है। जो शब्द बार बार आपके मुंह से निकलते हैं वो पूरे होने लगते हैं। मेरे एंकर बनने की बात एक नहीं दो नहीं बल्कि सभी क्लासमेट दोहराने लगे थे।

इन शब्दों के जादू के बारे में मुझे मेरी कजिन ने बताया था और सलाह दी कि मोटिवेशन के लिए मुझे  द-सीक्रेट पढ़नी चाहिए। मैं इस किताब को पढ़ने के लिए बेताब थी। हर दिन मेरी बेताबी बढ़ती ही जा रही थी। किसी भी दोस्त के पास वो किताब नहीं थी। लेकिन मुझे उम्मीद थी मैं वो किताब मैं एक दिन जरुर पढूंगी। मैं बार बार दोस्तों को बोलती कि मुझे कोई वो किताब लाकर देदे।

कुछ ही दिनों बार मेरे पापा का  फोन आया। उन्होंने बताया कि ‘नुपूर तुम जिस किताब के बारे में बता रही थी वो मेरी दुकान पर फोटो कॉपी के लिए आई हुई है, कहो तो तुम्हारे लिए भी एक कॉपी बनवा दूं। ’

ध्यान से समझिएगा दोस्तों उस किताब को लेकर मेरी शिद्दत, उसे पढ़ने की मेरी प्रबल इच्छा और बार बार शब्दों से उसे याद करने से जैसे जादू सा हो गया। वो किताब कुछ ही दिनों में मेरे पास आ गई।

बस उसी वक्त मैं शब्दों और विचाराें के जादू को समझने लग गई थी।

कई  दिनों तक मैने उस किताब को बड़ी ही शिदद्त से पढ़ा और मैंने जाना कि मुझे रिजेक्शन इसलिए मिला क्योंकि मैं खुद को लेकर बहुत नेगेटिव थी और हमेशा नेगेटिव लोगों और उनके कमेंट्स को मैंने खुद पर हावी होने दिया। मेरी गलती को मैं अब तक समझ चुकी थी। किताब पढ़कर मैं जान पाई कि शब्द, विचार और कर्म जब एक ही दिशा में काम करते हैं तो आपको मनचाही चीज हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता। इसे आसान भाषा में आपको समझना होगा। दरअसल यह किताब कोई जादू रातों रात नहीं करती यह आपको नियमित, लगातार कठिन परिश्रम करने और पाॅजिटिव माइंडसेट बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है। तो बताइए रिजेल्ट भी पॉजिटिव होगा ही ना। किताब पढ़ने के साथ ही मैंने खुद में बहुत से बदलाव महसूस किए। तब तक मैं खुद पर बहुत ज्यादा विश्वास करने लगी थी। मेरा आत्मविश्वास का स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ रहा था। इसी के चलते मुझे उदयपुर के पेसिफिक इंस्टीट्यूट के जर्नलिज्म विभाग में लेक्चरर की नौकरी भी मिल गई। हालांकि मेरा सपना सिर्फ एंकर बनना ही था। लेकिन खुद को तैयार करने के लिए इन सभी नौकरियों ने मेरी मदद की। मैं अपने आवाज को सभी तक पहुंचाना चाहती थी। हर दिन इसी के बारे में सोचती थी। कल्पनाओं में खुद को एंकरिंग करते देखती थी। फिर एक दिन अखबार के माध्यम से मुझे आकाशवाणी में युववाणी प्रोग्राम में वैकेंसी का पता चला। अॉडिशन देते ही मेरा वहां भी सलेक्शन हो गया। इसी के साथ मैं आकाशवाणी में भी प्रोग्राम देने लगी। ये वही मैं थी जिसकी आवाज कभी भी प्रभावशाली नहीं हुआ करती थी। और आकाशवाणी के जरिए पूरा शहर मेरी आवाज सुन पा रहा था।  बेहतरीन दिनों के लिए बुरे दिनों से लड़ना पड़ता है। मेरा वही दौर चल रहा था। अब मैं उदयपुर शहर के एक लोकल चैनल में एंकरिग भी करने लगी थी। पूरे शहर में मेरी आवाज और मेरी अपीयरेंस के चर्चे होने लगे थे। यह सिर्फ और सिर्फ कठिन परिश्रम और खुद में भरोसा करने से हुआ। मैं खुद से बहुत प्यार भी करने लगी थी। यह सब पाकर मैं दिन में कई बार भगवान का शुक्र अदा करती थी। द सीक्रेट बुक का अहम सिद्धांत है कि जितना आप कृतज्ञ होते हो उतनी ही तेजी से आपके सपने पूरे होते चले जाते हैं।

वो कहते है ना कि इंद्रधनुष का मजा लेने के लिए पहले भारी बारिश का सामना करना पड़ता है। एक दिन ऐसा ही हुआ। उदयपुर का लोकल चैनल बंद हो गया। मुझे मेरा सपना टूटता सा दिखाई दिया। लेकिन उस किताब ने मुझे सिखाया था कि ठहराव को कभी भी अपनी जिंदगी का हिस्सा नहीं बनने देना चाहिए। मुझे संघर्ष बढ़ता दिखाई दे रहा था। लेकिन असल में ये संघर्ष आपको आगे के लिए तैयार कर रहा होता है। मैंने इसे भगवान का इशारा समझा। और मैंने ठान ली कि अब इन सभी नौकरियों से आगे बढ़ने का समय आ गया है। मैंने अपने सपने को पूरा करने के लिए बड़े चैनलों में अप्लाई करना शुरू कर दिया। देश के सबसे बड़े नेटवर्क ईटीवी में मैंने सीधा एक बड़े पद पर कार्यरत अधिकारी से संपर्क किया। आप यकीन मानिए मैंने 6 महीने तक उन्हें सोशल मीडिया और मैसेज के ज़रिये उनसे संपर्क करने की कोशिश करती रही। आखिरकार मेरे अंदर के जूनून को देखते हुए उन्होंने मुझसे मिलने का मन बनाया। मैं आपको बता नहीं सकती उस महान शख्सियत के पास समय नही था लेकिन उदयपुर विजिट के दौरान उन्होंने बड़े ही सादगी से एक चाय के ठेले पर मुलाकात की और मुझमें विश्वास दिखाते हुआ मुझे ईटीवी में एंकर बनने का मौका दिया। और कहा ऐसे मौके बार बार नहीं आते, चुनौतियां आएंगी पर खुद को साबित करने का यही मौका है। अब नहीं तो कभी नहीं। डू इट नाउ और नेवर।

Image Credit: https://azadehkermani

मैं अपने सुनहरे सफर पर निकल चुकी थी। एक साल से मैं देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क में एंकर हूं। और अब समय है जल्द ही एक और नए सफर पर निकलने का एक और बड़ा सपना पूरा करने का।

 

धन्यवाद युनिवर्स……………….


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